पावन मिथिला (मिथिलाक पर्यटन-स्थल)

जगत जननी जानकीक आविर्भाव स्थल मिथिलाक पवित्र भुमिपर जतेक डेरा चलब ततेक ऐतिहासिक, पुरातात्विक आ धार्मिक स्थल भेटि जायत। ई पढबा-सु न बा मे भ ले हि अ तिश्योक्ति ल गै त हो, मु दा ज खन मिथिला क्षेत्र मे चारु भ रि न ज रि फिरा ए ब तँ ई स ह ज ला ग त। ए हि ठा म धार्मिक किंवा आध्यात्मिक स्थलक बहुतायत भेटत, तै ऐतिहासिक आ पुरातत्व स्थल एहिसँ थोडबो कम्म नत्रि भेटत। धार्मिको स्थल मे अधिकांश स्वयं मे इतिहास व पुरातात्विक महत्वके समेटने अछि।जेम्हरे टहलि जाउ वा कने कान पथि दियौ संगहि कनेको अँखिरार-चँकिरार होइ तँ ओहिठाम सिहकैत बसात इतिहास-गाथा सुनबैत भेटि जायत। से प्राचीन मिथिला वर्तमान मिथिला सँ कियेक भिन्न अछि, सोचनीय व विचारणीय विषय अछि।

मिथिलाक पर्यटन केन्द्र के विकसित कऽ देशक विभिन्न क्षेत्र सँ जुडेबाक प्रयास सँ आर्थिक स्थिति के सुदृढ कयल जा सकैत अछि। आर्थिक स्थिति सबल होयत तँ आतो-आन तरहक विकास सहजरुप सँ संभव भऽ सकैत अछि। एकरा संगहि एक बेर पुनः मिथिला अपन विशिष्ट परिचय सँ साक्षात्कार कराबैत विश्वक मुकुटमीण बनि सकैत अछि। पर्यटनक दृष्टि सँ मिथिलाक प्रतिष्ठा आओरो बढि सकैत अछि। मिथिला मे अखनहुँ देश-विदेश सँ लोक अबैत छथि। एहिठामक अक्षर-बह्य उपासक लोकनिक दिव्य कीर्ति केर अवलोकन करबाक लेल। मिथिला क विद्वत परम्परा हुनका लोकैन के मिथिलाक दर्शन करबाक लेल विवश करैत अछि। शोध केर क्रम मे अनेको विदेशी छात्र आ शिक्षक कामेश्वर सिंह संकृत विश्वविद्यालय, दरभंगा, ललित नारायण विश्वविद्यालय आ संकृत शोध संस्थानक घनी पुस्तकालयसँ सहयोग लेबाक लेल अबैत छिथ मिथिलाक चित्रकलाक अवलोकन किंवा ओहि पर विशेष काज करबाक होइत छनि तँ मधुबनीक राम मे सम किछु नजरि अबि जाइत छनि। एहि हिसाबे मिथिलाक एहि क्षेत्रके शैक्षिक पर्यटन केन्द्रक रुप मे विकसित कयल जा सकैत अछि। ओत्रहि मिथिलाक सम जिलाक ऐतिहासिक स्थल समके विकसित कयल जा सकैत अछि।

दरभंगा केर रामायणकालीन महर्षि गौतमक स्थान, अहल्यास्थान, भैरव बलिया, नवादक हैहट्ट देवी मंदीर, कसरौर गामक ज्वालामुखी भगवती, मकरन्द भडारिसौ केर वाणेश्वरी भगवतीक संग हायाघाटक सिमरदह, दरभंगा शहरक मिर्जापुर स्थित भगवती म्लेच्छमर्दिनी, राज परिसरक माघवेश्वर परिसर स्थित तारा व श्यामा मंदिर सहित अन्य देवी मंदिर, राज किलाक भीतर अवस्थित कंकाली मंदिर, कुश द्वारा स्थापित कुशेश्वरस्थान महादेव मंदिर, जिला मुख्यालय सँ सटले पच्चोम गामक डीह, कवीश्वर चन्दा झाक जन्मस्थली पिण्डारुध बहेडीक हावीडीह, भरवाडाक गोनू झाक गाम, कुशेश्वरस्थानक पक्षी विहार आदि अनेको एहम स्थल अछि जाहिठाम कंण-कण मे मिथिलाक र्स्वणिय यशोगाथाक इतिहास बजि रहल अछि।

एहि तरहे मधुबनी जिलाक महाकवि विद्यापतिक जन्मस्थली बिस्फी, कालीदासके ज्ञान देनिहार उच्चैठक घिन्नमस्तिका भगवती, शिवनगरक गाण्डीवेश्वरस्थान, कपिलेश्वरस्थान, मडरौनी, बलिराजगढ, वाचस्पति मिश्रक जन्मस्थली आ कवीश्वर चन्दा झाक सासुर अन्धराठादी, विदेश्वरस्थान, महरैल गामक समीप भेल लडाई "कन्दर्पीघाटक लडाई" केर ऐतिहासिक स्थल, मधेपुरक कणेश्वर महादेव मंदिर, गिरिजास्थान फुलहर मद्रकालीस्थान कोइलख, राजराजेश्वरी डोकहर, भुवनेश्वरीस्थान डोकहर सौराठ सभा, उग्रनाथ महादेव भवानीपुर, राजनगरक प्रसिद्ध किला आ भूतनाथ मंदिर, विशौल जतऽ सीता स्वयंवरक समय राजा जनक महर्षि विश्वामित्रक विश्राम करबाक व्यवस्था कराने छलाह, ठाढी गाम लगक मदनेश्वर महादेव आ कमलादित्य स्थान (परमेश्वरी मंदीर), जमुथरीक गौरी-शंकर मंदिर, परसा, झंझारपुरक सूर्य धाम, सरिध्वज जनकक पूर्वद्वारपर विराजमान शिलानाथ जे आब शिलानाथ गाममे छथि, एहि क्षेत्रक ददरी, जगवनक विमाण्डकाश्रम जाहिठाम विमाण्डक मुनिक कुटिर छलनि, जयनगरक समीप श्रीकूपेश्वर, कलमा गामक श्रीकल्याणेश्वर, पचहीक श्रीचामुण्डास्थान, महादेवमठ समीप शुक्रेश्वरी भगवती, बाबू बरही प्रखंडक सडरा-छजनाक बीच पाँचम-छठम शतावदीक अवतारी पुरुष सलहेसक डिह, सरिसवक अयाची मिश्रक डीह, सिद्ददेश्वरी स्थान, सूर्य मूत्रि सवास सहित दर्जनो स्थल अधि जे पर्यटन स्थलक रुपमे विकसित हेबाक संभावनाक प्रतीक्षा कऽ रहल अछि।

समस्तीपुरक जिलाक "ओइनी" जे मिथिलाक राजधानी रहल अछि आ जाहिठाम महाकवि विद्यापतिक समय बितलनि संगहि महाकवि अपन अधिकांश रचना एहिठाम कयलनि। पहिल हिन्दी तिलस्म उपन्यास लेखक देवकी नंदन खत्रीक जन्मभूमिक हेबाक संग स्वाधीनता संग्राम मे अपनाके समर्पित केनिहार खुदीराम बोससँ सेहो जुडल रहल अछि। एहिक अतिरिक्त पूसाक शिवसिंह डीह, महाकवि विद्यापतिक निर्वाण भूमि वाजितपुर विद्यापतिनगर, मोरवाक खुदनेश्वरस्थान, पाण्डव लोकनिकअज्ञातवासक स्थल रहल पाँड डीह, मंगलगढ, पटोरीक बाबा केवल स्थानमे अमर सिंह केर पूजन लेल देश-विदेश सँ लोक अबैत छथि। महान दार्शनिक उदयनाचार्यक गाम करियन, जोगेश्वरस्थान विभूतिपुर, मालीनगर शिवमंदिर घोली महादेव मंदिर खानपुर, घमौनक निरज्जन स्वामीक मंदीर आ सन्त दरिया साहेबक आश्रम, मन्नीपुर भगवती स्थान, रोसडा टीसनसँ किछु पूब मे अवस्थित विधिस्थान जतऽ चतुरानन बला विराजमान रहला, शहरक थानेश्वरस्थान, मुसरीघरारीक भगवती स्थान सहित अनेको मंदिर आदि अछि जे इतिहासक गीत गाबि रहल अछि। एकरा समके एक दोसरसँ जोडि पर्यटन केद्रक रुप मे विकसित करब संभव अछि। राष्ट्रकवि रामघारि सिंह ʼदिनकरʼ जिनक जन्मस्थली बेगुसराय जिलाक नौलागढ, जयमंगलागढ, वीरपुर-बरियारपूर, शिव मंदिर (गढपुरा), सिमरियाघाट, मुजफ्फरपुर केर खुदीराम बोस स्मारक, गरीबनाथ मंदिर, कोठियाक मजार, दाता कम्मल शाहक मजार, शिरुकही शिरफी काँटी, पूर्णिया केर भगवती पूरनदेवीक मंदिर, सिकलीगढ, किशनराज केर चर्चित खगरा मेला, लखीसराय केर श्रृंगी ऋषिक आश्रम, अशोकधाम, जलप्पा स्थान, गोविन्द स्थान रामपुर, पोखरामा, सहरसा जिला केर उग्रतारा स्थान महिषी, लक्ष्मीनाथ गोसाईक कुटी वनगाम, मण्डनभारती स्थान, कन्दाहाक सूर्यमंदिर, मत्स्यगन्धा मंदिर, उदाहीक दुर्गामंदिर, नौहट्टाक शिव मंदिर, देवनवन शिव मंदिर, कात्यायनी मंदिर, मधेपुरा केर कार, खिरहरि स्थान, सिंहेश्वरस्थान, रामनगर कालीमंदिर, द्रौपदीक वसन्तपुर किला, माता सीताक प्राकट्य स्थली सीतागढी केर जानकी मंदिर, पुनौराधाम, हलेश्वरस्थान, चामुण्डा स्थान, शिवहर जिलाक द्रौपदीक जन्मस्थली मानल जायवला देवकुलीधाम, वैशाली जिलान्तर्गत महनार मे गंगातट पर स्थित गणिनाथ गोविन्दक स्थान, बसाढ, कटिहार केर लक्ष्मीपुरक गुरु तेराबहादुरक ऐतिहासिक गुरुद्वारा, पक्षी अमयारण्य गोगाविल झील, कल्याणी झील, बेलबा, बाल्दीबाडी, शान्तिवट ओला फसीया, नबावरांज, दूमी-सूमी, मनिहारी, आहि चर्चित स्थल रहल अछि आ समहक अपन ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व अछि।

एही तरहे चम्पारण केर बेतिया राज, सोमेश्वर महादेव मंदिर, सीता कुण्ड चण्डीस्थान, हुसैनी जलविहार, गान्धी स्मारक, वाल्मीकि आश्रम, व्याघ्र परियोजना, देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर, भागलपुर केर सुलतानगंजमे गंगाजीक बीच अवस्थित बाबा अजगैबीनाथ, विक्रमशिलाक क्षेत्र, मन्दार पहाड,कहलगामक ऋषि जाहनुक स्थान, मनसादेवीक मंदिर, विषहरि स्थान, कुप्पाघाट, मुंगेर मे चाण्डाकिस्थान कर्णक उन्टल कराह, परिशाह गुफाक गुम्बज, शाह सूजा केर महल, लाबागढीक ऋषि-कुण्ड आदिक कोण-कोण सँ इतिहास बजैत अछि।

आजुक इण्टरनेट युग मे पढल लिखल जानकार लोकैन समग्र मिथिलाक नजियो तँ कम सँ कम अपना क्षेत्रक एहम स्थलक विस्तृत विवरण व चित्र विश्वभरिक इण्टरनेट उपयोग केनिहार घरि तँ पहुँचाए सकैत छथि जेपर्यटनक केन्द्र बनि सकैत अछि। ई काज मिथिला-मैथिली केनिहार स्वयंसेवी संगठन सेहो कऽ सकैत छथि। आउ हमरा लोकैन संकल्प ली जे अपना क्षेत्रक ऐतिहासिक धरोहर के विश्वक मानचित्र पर स्थापित करबाक लेल डेण उठाबी एवं एहि दिशा मे सघल व ठोस सकारात्मक कार्य सम्पादनक प्रति संकल्पित होई। तखनहि मिथिला मे अवस्थित धरोहर विश्वक मानचित्र पर अपन यश पताका फहरा सकैत अछि। इत्यश्रम। जय श्री हरी।